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संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) |
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à जेएलजी मुख्यतः किराएदार किसानों एवं छोटे किसानों को मिलाकर बनाया जा सकता है जो उस भूमि की उचित हक प्राप्त किए के बिना हीं उसपर खेती करते हैं । à जेएलजी सदस्य समान सामाजिक आर्थिक स्थिति एवं पृष्टभूमि के होने चाहिए जो कृषि कार्य में लगे हैं और संयुक्त देयता समूह के रूप में कार्य करने के लिए सहमत हैं । सदस्यगण समूह/वैयक्तिक ऋणों हेतु संयुक्त देयता लेने के लिए अ च्छी तरह से एक दूसरे पर विश्वास करना चाहिए । à सदस्य कम से कम एक वर्ष की अवधि के लिए निरंतर रूप से कृषि कार्य में संलग्न होने चाहिए । à सदस्य किसी अन्य औपचारिक वित्तीय संस्थान का चुककर्ता नही होना चाहिए । à जेएलजी एक हीं परिवार के सदस्यों को मिलाकर नहीं बनाया जाना चाहिए और उस परिवार के एक से अधिक सदस्य को जेएलजी में शामिल नहीं किया जाना चाहिए । à समूह का अत्यंत सक्रिय सदस्य को जेएलजी का नेता बनाया होना चाहिए और यह सुनिश्चित करने के लिए इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि समूह के नेता द्वारा बेनामी ऋण नहीं घेरा जाना चाहिए।
à किराए के किसानों जो मौखिक पट्टे अथवा फसल साझेदारी पर खेती की भूमि रखे हैं एवं छोटे किसान जिनके पास जेएलजी के निर्माण एवं वित्तीयन के जरिए भूमि धारण की गई भूमि का उचित हक नहीं है,को ऋण का बहाव उपलब्ध कराना ।
à
जेएलजी प्रणाली के जरिए
लक्षित ग्राहकों को संपार्श्विक मुक्त ऋण प्रदान करना ।.
à
बैंक एवं किराए के किसानों
के बीच आपसी विश्वास एवं भरोसा बनाना ।.
à
ऋण राशि की अधिकतम सीमा
प्रति व्यक्ति रु 50000.
फसल ऋणः रु 50000 तक - @ 7 प्रतिशत प्रति वर्ष (भारत सरकार द्वारा 2 प्रतिशत ब्याज अनुदान के तहत) मीयादी ऋणः
रु 50000 तक - @बीपीएलआर + टीपी - 2.50प्रतिशत = 10.50 प्रतिशत.
à कोई संपाश्चिक नहीं । तथापि,जेएलजी सदस्यों द्वारा दी जानेवाली आपसी गारंटियों को रिकार्ड में रखना चाहिए।
à उगाई गई फसल के उपज की तिथि से 2 माह के भीतर ऋण राशि का समायोजन किया जाना है ।
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